मनुष्य की इच्छाएँ अनंत हैं, लेकिन संयम के माध्यम से हम अपनी जरूरतों को सीमित करके पापों से बच सकते हैं

मनुष्य की इच्छाएँ अनंत हैं, लेकिन संयम के माध्यम से हम अपनी जरूरतों को सीमित करके पापों से बच सकते हैं

दैनिक न्यूज टाईम्स/जालंधर कैंट/(कमल) मनुष्य की इच्छाएँ अनंत हैं, लेकिन संयम के माध्यम से हम अपनी जरूरतों को सीमित करके पापों से बच सकते हैं।
उत्तम संयम धर्म जैन धर्म के सबसे पवित्र त्योहार दसलक्षण पर्व (पर्युषण) के छठे दिन मनाया जाता है। शास्त्री श्री रितेश जी जैन जी ने अपने प्रवचनों मे कहा कि संयम का वास्तविक अर्थ अपनी इच्छाओं, इंद्रियों और मन पर विजय प्राप्त करना है। मनुष्य की इच्छाएँ अनंत हैं, लेकिन संयम के माध्यम से हम अपनी जरूरतों को सीमित करके पापों से बच सकते हैं। दोपहर को मंदिर जी मे सैकड़ो हवन कुंडो मे शुद्ध अग्नि प्रज्वलित करके धूप खेवन किया गया और साय काल बड़ी LED स्क्रीन पर डॉक्यूमेंटरी फ़िल्म *तमिल जैन* को दिखाया गया जिसमे तमिलनाडु की समृद्ध जैन विरासत को दर्शाया गया! प्रथम शांतिधारा पुण्यार्जक परिवार श्री अचल कुमार जी जैन विकास जैन को प्राप्त हुआ एवं द्वितीय शांतिधारा श्री सुनील जी जैन, शरद जैन को प्राप्त हुआ!


इस अवसर पर श्री अनूप जैन, नीरज जैन, अशोक जैन, रजत जैन, रंजन जैन, विशाल जैन,दीपक जैन, अरिहंत जैन,सौरभ जैन, हर्षित जैन, विपिन जैन आदि उपस्थित रहे!

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