दैनिक न्यूज टाईम्स/जालंधर कैंट (नवीन कुमार):भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा नामित सिविल सदस्य कैंटोनमेंट बोर्ड ने पिछले दिनों कैंटोनमेंट बोर्ड कार्यालय में लोगों द्वारा अपने हकों के लिए प्रदर्शन करने वालों को आसामाजिक तत्व ब भ्रामक प्रचार करने वाली प्रेस विज्ञप्ति जो की लोकल मिलिट्री अथॉरिटी या कैंटोनमेंट बोर्ड द्वारा जारी की गई अभी तक स्पष्ट नहीं है का जोरदार शब्दों में खंडन किया हुआ इसे दुर्भाग्यपूर्ण निंदनीय व लोकतांत्रिक हको को कुचलने वाला बताया पुनीत भारती शुक्ला ने कहा कि वह लगभग तीन दशक से कैंटोनमेंट सिविल जनता के साथ कई मुद्दों के लिए संघर्ष करते आ रहे हैं, सिविल सदस्य नामित होने के तुरंत बाद छावनी में बंद रास्तों के मुद्दे दूसरी ही बोर्ड मीटिंग में उठाए, नाजायज तौर पर तोपखाना में बंद किए गए रास्ते पर पूरे तोपखाना निवासियों के साथ धरना प्रदर्शन व शिवाजी रोड को खुलवाने के लिए समय-समय पर मैंने बोर्ड में आवाज उठाई, परंतु खेद के साथ कहना पड़ता है की छावनी के अधिशासी अधिकारी छावनी के लोगों के हितों की रक्षा करने की बजाय लोकल मिलती अथॉरिटी के दबाव के नीचे काम करते हैं जिसकी वजह से लोगों को छावनी में अपने मौलिक अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है, शुक्ला ने स्पष्ट किया कि पिछले दिनों कैंटोनमेंट बोर्ड कार्यालय में छावनी की सिविल जनता दुकानदार व परेशान लोगों ने प्रदर्शन किया उनमें कोई भी आसामाजिक तत्व व भ्रम फैलाने वाला व्यक्ति नहीं था ऐसी विज्ञप्ति जारी करना लोकतंत्र के विरुद्ध है व ताना शाही पूर्ण है जिसकी वह जोरदार शब्दों में निंदा करते हैं
पुनीत भारती शुक्ल ने कहा कि भारत के वर्तमान यशस्वी प्रधानमंत्री व रक्षा मंत्री भारत की छावनियों को कैंटोनमेंट बोर्ड प्रणाली से मुक्त कर नगर निगम नगर पंचायत म्यूनिसिपल कमेटी में शामिल करने के लिए प्रयासरत है जल्द ही यह पूरा होने पर छावनी के लोगों की समस्याओं का हल हो जाएगा जिसकी पूरे भारतवासियों को वर्तमान सरकार से पूरी आस है ,
शुक्ला ने कहा कि कैंटोनमेंट बोर्ड में अधिशासी अधिकारी अपने मनमर्जियां करते हैं 73 ए जैसी धार जालंधर छावनी में पिछले 20 वर्षों से लोगों को टैक्सों के मामले में कुचल रही है जिसके लिए वह संघर्ष कर रहे हैं उन्होंने जनता से आह्वान किया कि इसको मिटाने के लिए हम एक होकर आए ताकि जनता को इससे निजात मिले, शुक्ला ने कहा छावनी के सिविल एरिया के आसपास मिलिट्री के पीछे 7-7 मंजिला इमारतें बनी हुई है परंतु छावनी की सिविल जनता जिनके मकान 100 वर्ष पहले बने हैं उन्हें एक ईंट लगाने के लिए भी कैंटोनमेंट बोर्ड के आगे गिड़गिड़ाना पड़ता है , हालांकि शुक्ला ने कहा उनके नामित सदस्य के बनने के बाद छावनी छावनी के सिविल जनता के मकानों दुकानों की जर्जर स्थिति में उन्हें दोबारा मरम्मत करने के लिए उन्होंने बोर्ड के माध्यम से जनता का पूरा साथ दिया है व मेरे कार्यकाल में सबसे ज्यादा जर्जर इमारत की मुरम्मत व रख रखाब हुआ, शुक्ला ने कहा छावनी में रजिस्ट्री बंद होने के कारण व मालिकाना हक के सबूत ना होने के कारण नक्शा पास नहीं होता परंतु अपनी पुरानी बिल्डिंगों की मरम्मत करना हुआ छत आदि बदलना हमारा मौलिक अधिकार है इसमें किसी तरह की मनाही नहीं है जनता भरम में ना रहे पूरा अधिकार है कैंटोनमेंट बोर्ड को सूचित करने के बाद अपना कार्य करें अगर किसी तरह की कैंटोनमेंट बोर्ड या किसी अधिकारी कर्मचारी से परेशानी आती है तो वह उनके साथ खड़े हैं परंतु साथ ही उन्होंने सिविल जनता से कहा किसी एंनक्रोचमेंट करने के विरुद्ध है उसके लिए कार्रवाई होना स्वाभाविक है