दशलक्षण महापर्व जैन धर्म का एक अत्यंत पवित्र और दस दिनों तक चलने वाला महापर्व है, जो मुख्य रूप से दिगंबर जैन समुदाय द्वारा आत्मा की शुद्धि, संयम और आत्म-अनुशासन के लिए मनाया जाता है। यह महापर्व 16 सितम्बर से प्रारम्भ होकर 25 सितम्बर को अनंत चतुर्दशी के दिन संपन्न होगा और इसके बाद क्षमावाणी पर्व मनाया जायेगा! इन दस दिनों मे आत्मा के दस सर्वोच्च धर्म लक्षणो का ध्यान किया जाता है जिसमे प्रथम दिवस ‘ उत्तम क्षमा ‘ धर्म के रूप मे मनाया जाता है! प्रात काल ध्वजारोहण के पश्चात श्री जी का अभिषेक एवं शांतिधारा की गयी और तत्पश्चात संगीत की मधुर धुन के साथ पूजन किया गया! पंडित श्री रितेश जी जैन शास्त्री (सागर) जी ने अपने प्रवचनों मे कहा “क्षमा वीरस्य भूषणम ” अर्थात क्षमा वीरों का आभूषण है! किसी अन्य व्यक्ति द्वारा अपमान या अनुचित व्यवहार किये जाने पर भी अपने मन में क्रोध या प्रतिशोध की भावना न लाना और शांत रहना ही उत्तम क्षमा कहलाता है! इस विशेष अवसर पर श्री अनूप जैन, नीरज जैन, सुनील जैन, अशोक जैन, विकास जैन, शैलेन्द्र जैन, अभिषेक जैन, नरेंद्र जैन, रजत जैन, विशाल जैन, अनुज जैन, राज कुमार जैन, गगन जैन आदि विशेष तौर पर उपस्थित रहे!