दैनिक न्यूज टाईम्स जालंधर, कैंट( बिट्टू गुलाटी) रोटेरियन महेश गुप्ता जी की धर्मपत्नी स्वर्गीय श्रीमती ममता गुप्ता जी की श्रद्धांजलि सभा का आयोजन वज्रा मल्टीपर्पस हॉल में श्रद्धा एवं भावपूर्ण वातावरण में किया गया। इस अवसर पर दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के संस्थापक एवं संचालक गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री गरिमा भारती जी ने विशेष रूप से उपस्थित होकर अपने आध्यात्मिक प्रवचनों के माध्यम से दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा शोकाकुल परिवार को जीवन के गहन आध्यात्मिक सत्यों से अवगत करवाया।
साध्वी गरिमा भारती जी ने श्री गरुड़ पुराण एवं श्रीमद्भगवद्गीता के आध्यात्मिक सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए जीवन की नश्वरता और आत्मा की अमरता पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संसार में प्रत्येक वस्तु परिवर्तनशील है। मनुष्य का शरीर भी नश्वर है, लेकिन आत्मा शाश्वत और अमर है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने आत्मा की अमरता का संदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि आत्मा न जन्म लेती है और न ही उसकी मृत्यु होती है। शरीर का अंत होना जीवन की यात्रा का अंत नहीं, बल्कि आत्मा की एक अवस्था से दूसरी अवस्था की ओर यात्रा है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन में मोह, माया और सांसारिक संबंधों में इतना उलझ जाता है कि वह जीवन के वास्तविक उद्देश्य को भूल जाता है। ऐसे समय में आध्यात्मिक ज्ञान मनुष्य को जीवन और मृत्यु के गूढ़ रहस्यों को समझने की दृष्टि प्रदान करता है। जब व्यक्ति आत्मज्ञान प्राप्त करता है, तब वह सुख-दुख और जन्म-मृत्यु के चक्र को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समझने में सक्षम होता है।
इस अवसर पर स्वामी सज्जनानंद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जीवन की वास्तविक सार्थकता केवल भौतिक सुख-सुविधाओं को प्राप्त करने में नहीं, बल्कि आत्मिक जागृति और ईश्वर से जुड़ने में निहित है। मनुष्य को यह समझना चाहिए कि शरीर नश्वर है, जबकि आत्मा परमात्मा का अंश होने के कारण शाश्वत है। आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से ही मनुष्य अपने जीवन के वास्तविक स्वरूप को पहचान सकता है और विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य एवं शांति बनाए रख सकता है।
श्रद्धांजलि सभा के दौरान उपस्थित साध्वी बहनों ने भी अपनी भावपूर्ण उपस्थिति से दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। इस अवसर पर साध्वी चन्द्रप्रभा भारती जी, साध्वी रिचा भारती जी, साध्वी शब्दप्रिया भारती जी, साध्वी दीपिका भारती जी, साध्वी पल्लवी भारती जी तथा स्वामी रविंदर जी भी मौजूद रहे।